बेंगलुरू . देश के पहले स्वदेशी मानव मिशन गगनयान काे हर पक्ष से सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए इसराे काेई कसर बाकी नहीं रखना चाहता। इसीलिए गगनयान के माॅडल काे मैसूर के महाराजा के समय बनी देश की सबसे बड़ी विंड टनल में परखा जा रहा है। यह ओपन-सर्किट विंड टनल बेंगलुरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) में है। माॅडल खरा उतरा, तो उसी आधार पर प्रोटोटाइप बनाया जाएगा। अन्यथा बदलाव किए जाएंगे।
इस टनल का निर्माण 1950 में शुरू हुआ था। 1959 में मैसूर के महाराजा जय चामराजेंद्र वाडियार (तत्कालीन गवर्नर) ने इसका उद्घाटन किया। देश में विमानन उद्याेग के फलने-फूलने में इस टनल का बड़ा याेगदान है। इसमें कूलिंग टावर, विमान, जहाज से लेकर लाॅन्च व्हीकल आदि के माॅडल का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण में निकली खामियाें काे सुधारकर वास्तविक प्राेटाेटाइप तैयार किया जाता है। यहां परीक्षण के लिए पहले लकड़ी के माॅडल बनाए जाते थे। अब साेने, प्लेटिनम, लकड़ी या चारकाेल या कभी-कभी कागज के भी माॅडल बनाए जाते हैं।
टनल में गगनयान की बनावट से लेकर इसमें इस्तेमाल तकनीकों का परीक्षण हवा के अलग-अलग दबाव पर किया जाएगा। आईआईएससी एयरोडायनामिक्स के प्रिंसिपल रिसर्च साइंटिस्ट वी. सुरेन्द्रनाथ के मुताबिक, गगनयान मिशन के हर फेज काे उसकी अधिकतम सुरक्षा के साथ परखा जाएगा। मालूम हो, गगनयान के अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण इन िदनों रूस में चल रहा है।
तब 1.4 लाख रुपए में बनी थी, शताब्दी का रेल इंजन का मॉडल भी यहीं परखा
- देश में अपनी तरह की पहली टनल है। यह 1.4 लाख रुपए में बनी थी।
- टनल 20 फुट चाैड़ी और 80 फुट लंबी है। इसके एक मुहाने पर 16 मीटर व्यास के दाे बड़े पंखे हैं, जाे 160 किमी प्रति घंटा की हवा फेंकते हैं।
- टनल में हवा का उच्च दबाव पैदा कर परखा जाता है कि माॅडल कितना टिकाऊ हाेगा। माॅडल को टनल के बीचाेबीच रखा जाता है।
- यहां सभी तरह के विमानाें के माॅडल, जहाजाें के माॅडल, रेलवे इंजन माॅडल, देश का पहला शताब्दी रेल इंजन, 1970 में दिल्ली म्यूनिसिपल काॅरपाेरेशन की 32 मंजिला इमारत के माॅडल काे भी परखा गया था।